IPO से पहले के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी
पिछले एक महीने में IPO की तैयारी कर रही अनलिस्टेड कंपनियों के शेयरों की डिमांड ग्रे मार्केट में जबरदस्त बढ़ी है। निवेशक ऐसे शेयरों को तेजी से खरीद रहे हैं जिनकी जल्द ही शेयर बाजार में लिस्टिंग की उम्मीद है। मजबूत लिस्टिंग गेन की उम्मीद में इनके वैल्यूएशन भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
इन IPO-बाउंड कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा मांग में
कई बड़ी कंपनियों के नाम निवेशकों के बीच चर्चा में हैं। Tata Technologies, NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज), Mobikwik और Ola Electric जैसी कंपनियां प्रमुख रूप से निवेशकों का ध्यान खींच रही हैं।
इन कंपनियों के शेयरों में पिछले चार हफ्तों में 30% से 60% तक की तेजी देखी गई है। खासतौर पर Tata Technologies का प्री-IPO शेयर प्राइस टाटा मोटर्स के स्टेक सेल के बाद तेजी से ऊपर गया है।
रिटेल और HNI क्यों लगा रहे हैं पैसा?
रिटेल निवेशक और हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) IPO से मजबूत रिटर्न की उम्मीद में इन अनलिस्टेड शेयरों में निवेश कर रहे हैं।
कई कंपनियां मजबूत पैरेंट कंपनियों से जुड़ी हैं जिससे रिस्क कम माना जा रहा है। साथ ही, स्टॉक मार्केट में हाल की स्थिरता से भी निवेशकों को भरोसा मिला है।
IPO कैलेंडर को लेकर बढ़ रही हलचल ने इस मांग को और बढ़ाया है। निवेशक लिस्टिंग से पहले कम कीमत पर इन शेयरों को खरीदना चाहते हैं।
इस तेजी के पीछे की बड़ी वजहें
- मार्केट में पॉजिटिव सेंटिमेंट: सेंसेक्स और निफ्टी में स्थिरता से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
- SEBI से क्लियरेंस: कई कंपनियों को IPO की मंजूरी मिल चुकी है।
- Q4 रिजल्ट्स का असर: आईटी और फाइनेंशियल सेक्टर के मजबूत नतीजों से सेंटिमेंट बेहतर हुआ है।
- ग्लोबल लिक्विडिटी: विदेशी निवेशकों की वापसी से ग्रे मार्केट में भी हलचल बढ़ी है।
इन सभी कारणों ने प्री-IPO शेयरों की मांग को रफ्तार दी है।
ग्रे मार्केट में बढ़ रहे प्रीमियम
ग्रे मार्केट में इन कंपनियों के शेयर प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। Tata Technologies का अनलिस्टेड शेयर ₹730 से बढ़कर ₹950 तक पहुंच गया है। NSE के शेयर मई में ₹3500 थे, अब ₹4100 पर ट्रेड हो रहे हैं।
यह दिखाता है कि निवेशकों को इनकी लिस्टिंग से भारी गेन की उम्मीद है।
इनवेस्टमेंट में रिस्क भी है
तेजी के बीच निवेशकों को कुछ जोखिमों का भी ध्यान रखना चाहिए:
- IPO की गारंटी नहीं: कंपनी कभी भी IPO टाल सकती है या SEBI से मंजूरी नहीं मिल सकती।
- लिक्विडिटी की कमी: अनलिस्टेड शेयर तुरंत बेचे नहीं जा सकते।
- वैल्यूएशन रिस्क: लिस्टिंग से पहले ज्यादा कीमत चुकाने पर बाद में घाटा हो सकता है।
इसलिए निवेश से पहले रिसर्च और एक्सपर्ट सलाह जरूर लें।
विशेषज्ञों की राय
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक नई IPO कंपनियां मार्केट में नहीं आतीं, तब तक यह रैली जारी रह सकती है।
अगर सेंटीमेंट पॉजिटिव रहा, तो इन अनलिस्टेड शेयरों में और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, Q3 2025 तक और डिजिटल कंपनियों के भी IPO आने की संभावना है।
निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान
अगर आप अनलिस्टेड IPO शेयरों में निवेश करना चाहते हैं, तो इन बातों पर जरूर गौर करें:
- कंपनी का बिजनेस मॉडल और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स
- पिछले फंडिंग राउंड और वैल्यूएशन
- प्रमोटर्स और मौजूदा निवेशकों की जानकारी
- IPO की टाइमलाइन और संभावित प्राइस रेंज
SEBI फाइलिंग्स पर नजर रखें और ग्रे मार्केट रेट्स को ट्रैक करते रहें।
निष्कर्ष: सोच-समझकर करें निवेश
IPO से पहले के इन शेयरों में तेजी और निवेशकों का रुझान दोनों ही हकीकत हैं। लेकिन हर निवेश स्मार्ट प्लानिंग से ही फायदे में बदलता है।
सिर्फ चर्चित नामों के पीछे न भागें। मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों को पहचानें और समय पर सही फैसला लें।
डिस्क्लेमर: निवेश करने से पहले किसी रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लेना जरूरी है।

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